बेवकूफ से पाला पड़े तो क्या करें

बेवकूफ से पाला पड़े तो क्या करें

बीरबल ग्यारह साल का था तब सारस्वत्य मंत्र जपता था । छोटी-सी उम्र में ही उस बालक ने सारस्वत्य मंत्र के जप से अपनी बुद्धि का इतना विकास कर लिया था कि अकबर ने उसे अपने मंत्री-पद पर नियुक्त कर दिया था। 

अकबर जब हिन्दुओं की, हिन्दू धर्म की धार्मिक मान्यताओं का मजाक उड़ाना चाहता तो बीरबल अपनी बुद्धिमत्ता से उसको ऐसा जवाब देता कि उसको मुँह की खानी पड़ती। बीरबल तो सनातन धर्मावलम्बी था। वह संतों का,शास्त्रों का, माता-पिता का बहुत आदर करता था । 

एक बार अकबर दरबार में बैठा था । बीरबल का मजाक उड़ाने की दृष्टि से बोला : ‘‘बीरबल ! जब तुम इतने होशियार हो तो तुम्हारे पिताजी कितने होशियार होंगे ! मैं तुम्हारे पिताजी से मिलना चाहता हूँ । बीरबल समझ गया कि जरूर कुछ गड़बड़ करेगा,लगता है ईर्ष्या करनेवालों का षड्यंत्र है । मेरे पिताजी का अपमान करना चाहता होगा ।
बीरबल ने कहा : ‘‘ठीक है हुजूर ! कल ले आऊँगा ।

घर जाकर बीरबल ने कहा : ‘‘पिताजी ! बादशाह आपसे मिलना चाहते हैं । कल सुबह आप दरबार में चले जाइये पर आपसे कोई भी कुछ भी पूछे तो मौन रहना,बोलना ही नहीं । बीरबल के पिताजी सुबह दरबार में पहुँचे । अकबर ने उन्हें पहले कभी देखा ही नहीं था,पहली मुलाकात थी । बीरबल जानबूझकर साथ में नहीं आया था । 

अकबर ने पूछा : ‘‘आप कौन हैं श्रीमान ? वे चुप रहे । 
‘‘आप बीरबल के पिताजी हैं ?" ‘‘अरे ! आप बहरे तो नहीं हैं ?" ‘‘कुछ तो बोलो !‘‘
आपका नाम क्या है, कहाँ से आये हैं ?                  
तो चुपचाप खड़े रहे । 
अकबर : ‘‘कैसे आदमी से पाला पड़ा ! सिपाही ! इसको बाहर ले जाओ । 

अगले दिन जब बीरबल दरबार में आया तो अकबर बोला : ‘‘बीरबल ! किसी बेवकूफ से पाला पड़े तो क्या करना चाहिए ?
 ‘‘हुजूर ! चुप रहना चाहिए।" अकबर अपने-आप बेवकूफ सिद्ध हो गया। 
सभी लोग हँस पड़े । 
अकबर और उसके चापलूसों का सिर शर्म से नीचा हो गया।
                                                                      ✍🏻सीख : हर व्यक्ति में ईश्वर का अनंत सामर्थ्य छुपा है । यदि उसे सद्गुरु का संग मिल जाय और वह गुरुवचनों के अनुसार चलने लगे तो संसार में ऐसा क्षेत्र नहीं,जहाँ उसे सफलता न मिले।

✒प्रश्नोत्तरी : 
(1) अकबर की कुचाल से बचने के लिए बीरबल ने अपने पिताजी को क्या युक्ति बतायी और उससे क्या हुआ ?
(2) मौन के 9 लाभ कौन-से हैं ?

📚बाल संस्कार पाठ्यक्रम - (तीसरा सप्ताह)
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