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बुद्धि नष्ट कैसे होती है और महान कैसे होती है

बुद्धि नष्ट कैसे होती है और महान कैसे होती है

बुद्धि को भगवत्प्राप्ति के योग्य बनाओ। जो जरूरी है वह करो, अनावश्यक कार्य और भोग सामग्री में उलझो नहीं। जब बुद्धि बाहर सुख दिखाती है तो क्षीण हो जाती है और जब अंतर्मुख होती है तो महान हो जाती है। 

 🔹बुद्धि नष्ट कैसे होती है ? 

अपने-आप में अतृप्त रहना, असंतुष्ट रहना, किसी के प्रति राग-द्वेष करना, भयभीत रहना, क्रोध करना आदि से बुद्धि कमजोर हो जाती है।

जो काम है, वासना है कि ʹयह मिल जाय तो सुखी हो जाऊँ, यह पाऊँ, यह भोगूँ....ʹ इससे बुद्धि छोटी हो जाती है।

 🔹बुद्धि महान कैसे होती है ? 

सत्य बोलने से बुद्धि विलक्षण लक्षणों से सम्पन्न होती है।

जप-ध्यान, महापुरुषों के सत्संग द्वारा अपने को परमात्म-रस से तृप्त करने से बुद्धि महान हो जाती है।

भगवान के, गुरु के चिन्तन से राग-द्वेष मिटता है और बुद्धि तृप्त होती है। जिन कारणों से बुद्धि उन्नत होती है वे सत्संग में मिलते हैं और जिन कारणों से बुद्धि भ्रष्ट हो जाती है उनसे बचने का उपाय भी सत्संग में ही मिलता है। सत्संग बुद्धि की जड़ता को हरता है, वाणी में सत्य का संचार करता है, पाप दूर करता है, चित्त को आनंदित करता है और यश व प्रसन्नता का विस्तार करता है। अतः प्रयत्नपूर्वक किन्हीं समर्थ संत-महापुरुष के सत्संग में पहुँच जाओ और ईश्वरीय भक्तिरस से अपने हृदय व बुद्धि को पवित्र कर दो। अपने को तो आप जिसके हैं उसी को पाने वाला बनाओ। आप परमात्मा के हैं अतः परमात्मा को पा लो बस ! इससे आपकी बुद्धि बहुत ऊँची हो जायेगी। बुद्धि को निष्काम नारायण में आनंदित होने दो। इससे आपकी बुद्धि में चिन्मय सुख आयेगा। ૐ....ૐ..... ૐ....

 हितकारी वाणीः "तुम्हारा शरीर तंदुरुस्त रहे,तुम्हारा मन प्रसन्न रहे, बुद्धि में समता रहे,साथ ही बुद्धि में बुद्धिदाता का आनंद प्रकट हो, यही मैं चाहता हूँ।" 
               - पूज्य बापू जी 

 ✍🏻सोचें व जवाब दें- 

 बुद्धि किन कारणों से कमजोर होती है ? 

 सत्संग की महिमा बतायें। 

 क्रियाकलापः बुद्धि को महान बनाने के उपायों पर चर्चा करें व उन्हें जीवन में उतारें।
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