दुनिया में अंधे अधिक हैं
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दुनिया में अंधे अधिक हैं

पूज्य संत श्री आशारामजी बापूजी

एक दिन बादशाह अकबर की सभा में एक प्रश्न उठा :
"अंधे अधिक हैं या आँखों वाले अधिक हैं ?"

सबने कहा :"आँखों वाले अधिक हैं।"

बीरबल ने कहा :"अंधे अधिक हैं ।

बादशाह :"यदि ऐसा है तो सिद्ध करो।"

बीरबल ने एक कपड़ा सिर पर बाँधा और पूछा :"यह क्या है।"
सबने कहा :"पगड़ी"

उसी कपड़े को कंधे पर रखकर पूछा तो सबने कहा :"दुपट्टा"। 
कमर पर बाँधकर पूछा तो सबने "धोती" कहा।
बीरबल बोला :"जहाँपनाह ! सभी अंधे हैं क्योंकि कपड़ा कोई नहीं कहता।"

जिस प्रकार पगड़ी,दुपट्टा,
धोती में सूत तत्व (कपड़े)को कोई नहीं देखता,कपड़े के भिन्न-भिन्न आकारों को ही देखते हैं,उसी प्रकार माया की मिलावट से बनी सृष्टि में संसार के व्यक्ति-वस्तु सब देखते हैं पर रोम-रोम,कण-कण में रम रहा ब्रह्मतत्व जिन्हें नहीं दिखता वे सब अंधे ही हैं।

✍🏻व्यावहारिक दृष्टि से उस परब्रह्म परमात्मा की आह्लादिनी शक्ति माया में यह जगत,उसके पंचमहाभूत
और सब भौतिक वस्तुएँ दिखती हैं परंतु तात्विक दृष्टि से देखा जाये तो एकद्वितीयं....अनंत ब्रह्मांडों में वह एक ही परमात्म तत्व फैला हुआ है।

📚लोक कल्याण सेतु/जुलाई-अग. २००६
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