भक्तवत्सल बापूजी ने दुःखद प्रारब्ध हर लिया
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भक्तवत्सल बापूजी ने दुःखद प्रारब्ध हर लिया

साध्वी सजनी बहन,जो पिछले 36 वर्षों से संत श्री आशारामजी महिला उत्थान आश्रम में सेवा-साधना परायण जीवन का सौभाग्य प्राप्त करते हुए अपना आध्यात्मिक उत्थान कर रही हैं और जिन्हें पूज्य बापूजी की पूजनीया मातुश्री श्री
माँ महँगीबाजी की निजी सेवा का सौभाग्य भी मिला, अपने जीवन का एक प्रसंग बताते हुए कहती हैं : ‘‘बचपन से ही मैं पैरों के दर्द व पेट की तकलीफों से बहुत परेशान थी । जिस दिन दवाई न लेती उस दिन चलना मुश्किल हो जाता था । 

एक बार मैं पूज्य बापूजी के दर्शन करने आश्रम गयी तो पूज्यश्री ने मुझे प्रसाद दिया । प्रसाद खाने के बाद कुछ ही देर में सालों पुराना पैरों का दर्द चला गया । पूज्य बापूजी की कृपा का ऐसा सामर्थ्य देख मैं दंग रह गयी ! उसके बाद मैंने आज तक पैर- दर्द की एक भी गोली नहीं ली । बाद में मैंने पूज्य बापूजी से मंत्रदीक्षा ले ली और मुझे महिला आश्रम में रहने का सौभाग्य भी मिला । यहाँ मुझे बड़ी शांति मिली एवं मनोबल व आध्यात्मिक बल में वृद्धि होने लगी ।

पर मेरा तीव्र प्रारब्ध होगा इसलिए यहाँ भी रोगों ने पीछा नहीं छोड़ा । बहुत इलाज कराने पर भी लाभ न हुआ बल्कि तकलीफ बढ़ती गयी । आँतों में छाले पड़ गये । पानी की एक बूँद भी पेट में नहीं टिकती थी । मेरा वजन मात्र 27 किलो रह गया । वैद्यों व डॉक्टरों ने भी जवाब दे दिया । 

मैंने पूज्य बापूजी के श्रीचरणों में समस्या निवेदित की तो गुरुदेव ने मुझे हिम्मत दी और कृपास्वरूप स्वास्थ्य मंत्र तथा रुद्राक्ष की माला दी । पूज्यश्री के आशीर्वाद एवं प्रसाद से मेरे चित्त को बहुत ही शांति मिली । रात को सपने में बापूजी के दर्शन हुए । भक्तवत्सल बापूजी बोले : ‘‘बेटी ! तेरा जो दुःखद प्रारब्ध था,उसको मैंने हर लिया है । अब तू निश्चिंत रह । दूसरे दिन से ही मेरा स्वास्थ्य ठीक होने लगा । सारी तकलीफें ठीक हो गयीं । कहाँ तो एक-एक दिन जीना भी मुश्किल हो रहा था और आज मुझे आश्रम में रहते हुए 36 साल हो गये, मैं एकदम स्वस्थ हूँ ।
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