सर्वफलदायक माघ मास व्रत
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सर्वफलदायक माघ मास व्रत

(माघ मास २२ जनवरी से १९ फरवरी)
पुण्यदायी स्नान सुधारे स्वभाव

माघ मास में प्रातःस्नान (ब्राह्ममुहूर्त में स्नान) सब कुछ देता है। आयुष्य लम्बा करता है, अकाल मृत्यु से रक्षा करता है, आरोग्य, रूप, बल, सौभाग्य व सदाचरण देता है। 

जो बच्चे सदाचरण के मार्ग से हट गये हैं उनको भी पुचकार के, इनाम देकर भी प्रातःस्नान कराओ तो उन्हें समझाने से, मारने-पीटने से या और कुछ करने से वे उतना नहीं सुधर सकते हैं, घर से निकाल देने से भी इतना नहीं सुधरेंगे जितना माघ मास में सुबह का स्नान करने से वे सुधरेंगे। 

तो माघ स्नान से सदाचरण, संतानवृद्धि, सत्संग, सत्य और उदारभाव आदि का प्राकट्य होता है। व्यक्ति की सुरता माने समझ उत्तम गुणों से सम्पन्न हो जाती है। उसकी दरिद्रता और पाप दूर हो जाते हैं । दुर्भाग्य का कीचड़ सूख जाता है। माघ मास में सत्संग-प्रातःस्नान जिसने किया, उसके लिए नरक का डर सदा के
लिए खत्म हो जाता है। मरने के बाद वह नरक में नहीं जायेगा । 

*माघ मास के प्रातःस्नान से  वृत्तियाँ निर्मल होती हैं, विचार ऊँचे होते हैं । समस्त पापों से मुक्ति होती है। ईश्वरप्राप्ति नहीं करनी हो तब भी माघ मास का सत्संग और पुण्यस्नान स्वर्गलोक तो सहज में ही तुम्हारा पक्का करा देता है । 

माघ मास पुण्य स्नान यत्नपूर्वक का  करना चाहिए। यत्नपूर्वक माघ मास के प्रातः स्नान से विद्या निर्मल होती है।

मलिन विद्या क्या है ?
पढ़-लिखकर कर दूसरों को ठगो, दारू पियो,क्लबों में जाओ, बॉयफ्रेंड-गर्लफ्रेंड करो -  यह मलिन विद्या है लेकिन निर्मल विद्या होगी तो इस पापाचरण में रुचि नहीं होगी। माघ के प्रातः स्नान से निर्मल विद्या व कीर्ति मिलती है।

माघ मास का प्रातः स्नान असमर्थ  को सामर्थ्य देता है,निर्धन को धन,बीमार को आरोग्य,पापी को पुण्य व निर्बल को बल देता है।

📚ऋषि प्रसाद/जनवरी 2014
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