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मकर संक्रांति का महत्त्व और लाभ

"मैं तो चाहता हूँ कि आप-अपने को ही भगवान के चरणों में दान कर डालो। उससे प्रार्थना करो कि ‘हे प्रभु ! तुम मेरा जीवत्व ले लो... तुम मेरा अहं ले लो... मेरा जो कुछ है वह सब तुम ले लो... तुम मुझे भी ले लो... ।"

              -पूज्य बापूजी

द्रोणाचार्य बड़ी गरीबी में जीवन-यापन करते थे । उनका अयाचक व्रत था, किसीसे कुछ माँगते न थे । लूली लँगड़ी गाय थी,उसी के दूध से दही, छाछ, मक्खन आदि बनाकर द्रोणाचार्य की धर्मपत्नी कृपी परिवार का गुजारा करती थी । 

कृपी ने देखा कि संत दुर्वासा हमारे द्वार पर आये हैं । उसने बड़े प्रेम से उनके भोजनादि की व्यवस्था की । संत लेते तो कुछ अन्न-जल या पत्र-पुष्प हैं लेकिन देना बहुत ऊँचा चाहते हैं क्योंकि देना उनका स्वभाव हो जाता है, दिये बिना उनसे रहा नहीं जाता ।

दुर्वासाजी ने कृपी से पूछा : ‘‘बेटी ! सेवा करने से तेरे चेहरे पर प्रसन्नता दिखाई देनी चाहिेए वह दिखाई नहीं दे रही । क्या बात है ? कृपी ने अपना दुःख सुनाते हुए कहा : ‘‘पतिदेव धनुर्विद्या में मसगूल हैं । उनका अयाचक व्रत है । घर में एक लँगड़ी गाय है । जिससे बड़ी कठिनता से गुजारा होता है । 

‘‘बेटी ! एक कठिनाई और सह ले। जब मकर संक्रांति आये तब दूध जमाकर दही बनाना । श्रीकृष्ण और माता यशोदा की छोटी-सी प्रतिमा बनवा लेना । उसे उस दधिमंथन की जगह पर उस दही में रखना । फिर निकालकर दही मथना और मक्खन बनाना । कन्हैया और माता यशोदा को उसका भोग लगाकर मकर संक्रांति के दिन दान कर देना । उस दिन किया गया दान अनंत गुना फल देता है। तेरा पुत्रप्राप्ति का संकल्प भी पूरा हो जायेगा और धनप्राप्ति का संकल्प भी । 

कृपी ने ऐसा ही किया । उन्हें संत के संकल्प एवं व्रत के प्रभाव से अश्वत्थामा जैसा पुत्र प्राप्त हुआ एवं धनधान्य भी बढ़ता गया । अश्वत्थामा सात चिरंजीवियों में एक हैं और अभी भी नर्मदा किनारे किसी-किसी को दर्शन देते हैं।

मकर संक्रांति अथवा उत्तरायण दान-पुण्य का पर्व है। इस दिन किया गया दान-पुण्य, जप-तप अनंतगुना फल देता है । इस दिन कोई रुपया-पैसा दान करता है,कोई तिल-गुड़ दान करता है । मैं तो चाहता हूँ कि आप-अपने को ही भगवान के चरणों में दान कर डालो । उससे प्रार्थना करो कि ‘हे प्रभु ! तु मेरा जीवत्व ले लो... तु मेरा अहं
ले लो... मेरा जो कुछ है वह सब तु ले लो... तु मुझे भी ले लो... । जिसको आज तक ‘मैं और ‘मेरा मानते थे वह ईश्वर को अर्पित कर दोगे तो बचेगा क्या ? ईश्वर ही तो बच जायेंगे...

✒प्रश्नोत्तरी :  (1)दुर्वासाजी ने कृपी को कौन-सा उपाय बताया जिसके कारण उनकी दरिद्रता दूर हुई ?

(2) मकर संक्रांति के दिन दान करने से क्या होता है ?

📚बाल संस्कार पाठ्यक्रम : दूसरा सप्ताह
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